लाइट झारखंड ब्यूरो रिपोर्ट – झारखंड में कुड़मी समाज ने 20 सितंबर 2025 से अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन रेल रोको आंदोलन शुरू किया है। यह आंदोलन झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के लगभग 100 रेलवे स्टेशनों पर फैल गया है, जहां कुड़मी समाज के लोग रेलवे ट्रैक पर बैठ कर रेल परिचालन को पूरी तरह प्रभावित कर रहे हैं।
आंदोलन के तहत रांची, मूरी, राय, टाटीसिलवे, मेसरा समेत कई महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों पर यातायात बाधित है। रेलवे प्रशासन ने कई ट्रेनों को रद्द, डायवर्ट या आंशिक समापन किया है। आंदोलन की वजह से पूर्व मध्य रेलवे, दक्षिण पूर्व रेलवे और पूर्व रेलवे की ट्रेनों को भारी नुकसान पहुंचा है। कुल मिलाकर 22 ट्रेनों को रद्द और दर्जनों को रूट बदला गया है।
कुड़मी समाज अपने को 1931 से पूर्व आदिवासी बताते हुए एसटी सूची में शामिल करने तथा कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में जोड़ने की मांग कर रहा है। इस आंदोलन के कारण यात्रियों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, और रेलवे प्रशासन ने गैर जरूरी यात्रा न करने की अपील भी की है।
कुड़मी समाज के नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन ऐतिहासिक होगा और सरकारी स्तर पर उनकी मांगे मंगवाने के लिए यह प्रभावी कदम है। राज्य सरकार और रेलवे प्रशासन इस आंदोलन के मद्देनजर सतर्क हैं।











